दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करें ना कोए । जो सुख में सुमिरन करे, त...
कबीरदास कहते हैं कि मनुष्य दुःख में उन सभी को याद करता है जो कोई भी उसकी मदद कर सकता है पर...
कांकर पाथर जोरि के, मस्जिद लेई बनाए । ता चढ़ी मुल्ला बांग दे,क्या बहिर...
कबीरदास सवाल करते हैं की बड़ी मेहनत से कंकड़ों और पत्थरों को जोड़ कर बनी हुई मस्जिद को बनाने...
मूढ़ मूढाए हरी मिले, तो सब कोई लेते मूढाए । बार-बार के मूढ़ते, भेड़ ना...
अगर सिर मुंडा लेने से हरि मिल सकते होतें तो सभी को अपना-अपना सिर मुंडा लेना चाहिए और यदि ब...
कबीरा मन पंछी भया, भावे तहाँ आ जाए । जो जैसी संगत करे, सो तैसा फल पाए...
कबीरदास कहते हैं कि मनुष्य का मन पंछी समान होता हैं । जिसे जहॉ पर जाना हो या जिसके साथ जान...
माटी कहे कुम्हार से, तू क्यों रौंदे मोए । इक दिंन ऐसा आएगा, मैं रौंदूँ...
कबीरदास इस दोहे में मिट्टी को समय की जगह पर रख कर बताते हैं की जिस तरह कुम्हार बर्तन बनाने...
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोया । जो दिल खोजा आपनो, मुझसे बुर...
जग की बुराईयाँ खोजने हेतु अपितु उन्हें कोई बुराई दिखाई ही नही देती है क्योंकि जब वे उन सार...
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब । पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब ॥
मनुष्य को कल पर छोड़े हुए कार्य आज और आज पर छोड़े हुए कार्य अभी समाप्त कर लेने चाहिए । क्यों...
बड़ा हुआ तो क्या हुआ,जैसे पेड़ खजूर । पंथी को छाया नहीं,फल लागे अत्ती...
खजूर के पेड़ की भाँति किसी व्यक्ति का बड़े होने का कोई महत्व ही नहीं, क्यूँकि खजूर का पेड़...
दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करें ना कोए । जो सुख में सुमिरन करे, त...
कबीरदास कहते हैं कि मनुष्य दुःख में उन सभी को याद करता है जो कोई भी उसकी मदद कर सकता है पर...
चाह मिटी, चिंता मिटी मनवा बेपरवाह । जिसको कुछ नहीं चाहिए वह शहनशाह॥
कबीरदास जी कहते हैं कि जब से पाने की चाह और चिंता मिट गयी है, तब से मन बेपरवाह हो गया है।...
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर । कर का मन का डार दे, मन का मनका फ...
कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमाता है, पर उसके मन का भाव नहीं बद...
तिनका कबहुँ ना निंदये, जो पाँव तले होय । कबहुँ उड़ आँखो पड़े, पीर घाने...
कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा न करो जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता...
गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागूं पाँय । बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दि...
कबीरदास जी सोचते हैं की गुरु और गोविंद रुपी भगवान् दोनों ही मेरे सामने खड़े हैं । मैं पहले...
सुख मे सुमिरन ना किया, दु:ख में करते याद । कह कबीर ता दास की, कौन सुने...
कबीर दास जी कहते हैं कि जब समय अच्छा होता है तो लोग और लोगो को भूल जाते है क्योकि सब कुछ स...
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय । माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय...
अगर कोई माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे तब भी फल तो ऋतु आने पर ही लगेगा, आज प...
रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय । हीरा जन्म अमोल था, कोड़ी बदले जाय...
संत कबीर जी कहते हैं की जो व्यक्ति इस संसार में बिना कोई कर्म किए रात्रि को सो कर और दिन भ...
साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै थोथा देई उडाय॥
कबीर दास जी कहते हैं की सद्पुरुष के गुण एक सूप के समान होने चाहिए, जैसे सूप केवल अनाज के अ...
साँई इतना दीजिए जामें कुटुंब समाय । मैं भी भूखा ना रहूँ साधु न भुखा जा...
कबीर दास जी भगवान से विनती करते हैं, "हे ईश्वर! मेरे ऊपर इतनी कृपा बनाए रखना कि मेरे परिवा...
जो तोको काँटा बुवै ताहि बोव तू फूल। तोहि फूल को फूल है वाको है तिरसुल॥
कबीरदास जी कहते हैं कि जो तुम्हारे लिए परेशानी या मुसीबत खड़ी करे, तुम उसके आचरण के विरोध...
उठा बगुला प्रेम का तिनका चढ़ा अकास। तिनका तिनके से मिला तिन का तिन के...
यदि कोई निर्बल व्यक्ति भी प्रेम रुपी बगुले का सहारा लेता है किसी को पाने के लिए तो अंततः उ...
सात समंदर की मसि करौं लेखनि सब बनराइ। धरती सब कागद करौं हरि गुण लिखा न...
कबीर दास जी कहते हैं कि यदि मैं इन सातों समंदर को अपनी लेखनी कि स्याही कि तरह और इस धरती क...
बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि। हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आन...
कबीर दास जी कहते है कि वाणी एक अमूल्य रत्न है। जो कोई बोल सकता है उसे यह जानना चाहिए। और य...
कबीरा गर्व न कीजिए, कबहुं ना हंसिए कोए । अजहुँ नाव समुद्र में, न जाने...
कभी अपने आप पे घमंड नहीं करना चाहिए और न ही किसी और पर हसना चाहिए। कबीर दास जी कहते है कि...
Laxmi Business Inc. 2.0: 5 New Things You Can Expect
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